राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अनसुनी कहानी | Personal Life | Draupadi Murmu | राष्ट्रपति चुनाव

Опубликовано: 18 Июнь 2026
на канале: Girraj Kumhar
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राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को हुए मतदान के बाद गुरुवार को हुई मतगणना में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को बड़े अंतर से जीत मिली है.

द्रौपदी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओड़िशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडु था। उन्होंने श्याम चरण मुर्मू से विवाह किया। उनके दो बेटे और एक बेटी हुए। दुर्भाग्यवश दोनों बेटों और उनके पति तीनों की अलग-अलग समय पर अकाल मृत्यु हो गयी। द्रौपदी मुर्मू ने एक अध्यापिका के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन आरम्भ किया। उसके बाद धीरे-धीरे राजनीति में आ गयीं। द्रौपदी मुर्मू ने साल 1997 में राइरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन का आरंभ किया था।झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का खिताब भी द्रौपदी मुर्मू के नाम रहा। साथ ही वह किसी भी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी भी हैं।

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