भीमकुंड का रहस्य: महाभारत | Mahabharat

Опубликовано: 05 Август 2026
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भीमकुंड मध्य प्रदेश के छतरपुर में है
भीमकुंड का रहस्य आज तक कोई नहीं समझ पाया, देश - विदेश से आए वैज्ञानिको ने हार मान ली ,कुछ डर भी गए,और किसी के कुछ हाथ नहीं लगा। Asia महाद्वीप में आनी वाली आपदा के संकेत भीम कुंड के पानी में मिलते हैं सन 2004 में जब दक्षिण में सुनामी आई थी तो यहां भीम कुंड के पानी का स्तर 80 फीट ऊपर आ गया था कोई भी आपदा आने लगती है तो भीम कुंड के पानी का स्तर बढ़ जाता है कोई भी किसी भी तरह के संकेत मिलते हैं तो आसपास रहने वाले लोग प्रशासन को जाकर खबर कर देते हैं दिल्ली में भूकंप से पहले भी भीमकुंड में संकेत मिले थे आपको बता दें सन 2004 में जब दक्षिण में सुनामी आई थी जब यहां संकेत मिले उसके बाद डिस्कवरी चैनल भी हां आए थे अपने गोताखोरों के साथ काफी गोताखोरों ने भीमकुंड में गोते भी लगाए लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा किसी को कुछ पता नहीं चला कि भीम कुंड की गहराई कितनी है और इसका पानी कहां से आ रहा है कहा जाता है कि एक ठंडा लावा है आपको बता दे,
यहां का पानी इतना साफ है कि आप उनके अंदर की जगह को भी आसानी से देख सकते हैं अच्छी तरह से देख सकते हैं पानी का रंग है नीला और जिन चट्टानों के अंदर यह भीमकुंड बना है उसके ऊपर एक गोल खुला आकार है जहां से सूर्य की किरणें पानी पर पड़ती हैं तो पानी बहुत ही सुंदर अलग-अलग रंगों में दिखता है पानी इतना साफ है कि यहां पर जब पर्यटक आते हैं तो बोतलों में भी भरकर ले जाते हैं आपको बता दें माना जाता है कि इस कुंड के पानी की तीन बूंद से ही प्यास बुझ जाती है

महाभारत काल से जुड़ा है भीमकुंड का रहस्य जब पांडवों को अज्ञातवास के लिए वन जाना पड़ा, तो रास्ते में द्रोपदी जी को प्यास लगी और उन्होंने पांडवों से कहा पानी के लिए, पांडवों ने हर जगह खोज करी पर पानी कहीं नहीं मिला, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने छोटे भाई नकुल से कहा कि उन्हें क्षमता है उसका स्मरण करें और पाताल में खोजें की पानी कहां है, नकुल ने आज्ञा मानी और अपना कार्य शुरू कर दिया और कुछ समय में उन्हें पता लगा कि धरती में किस जगह पर पानी है, लेकिन उस पानी को निकाले कैसे ? कोई समाधान नहीं निकला, तो द्रोपदी ने फिर से कहा उन्हें बहुत प्यास लगी है तब क्रोध में आकर भीम खड़े हुए और उन्होंने अपना गदा धरती पर मारा और धरती फट गई और नीचे पानी दिखा, लेकिन वह पानी की गहराई 30 फीट ज़मीन से थी, युधिष्ठिर ने फिर अर्जुन से कहा कि वे अपनी धनुर्विद्या से धनुष चलाएं और अर्जुन ने आज्ञा का पालन करते हुए अपना बाण चलाया और और पानी तक जाने का मार्ग बना दिया, तब सभी पांडव द्रोपदी के साथ नीचे पानी की तरफ उतरे और वहां पर जाकर सब ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई, इसलिए इसे भीम कुंड कहा जाता है
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