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नीतीश जी ने अपने आपको विकास का एक स्वर्णिम मानक मान लिया है कि जो मुझे आता है वही सब है वही काफी है किसी दूसरे को कुछ नहीं आता है ये दिक्कत है आप उनसे पूछिए कि साहब नीति आयोग में तो बिहार को नीचे बताया जा रहा है तो नीतीश जी का जवाब पत्रकारों के साथ क्या था भक्क उ सबको कुछ आता है अरे भाई जो डेटा बना रहा उसको कुछ आता नहीं है जो बाहर के दूसरे राज्य वाले अच्छा कर रहे हैं उनको कुछ आता नहीं है राज्य के लोग जो बाहर कर रहे हैं उनको कुछ आता नहीं है तो सिर्फ आप ही को आता है ठीक है आप मुख्यमंत्री हैं सुधार दीजिए सबको और नहीं सुधारते हैं तो है विनम्र बनिए कि भाई हम अकेले नहीं कर पा रहे हैं 20 लोगों को बुलाते हैं चर्चा करते हैं उसका रास्ता बनाते हैं लोकतंत्र तो ऐसे चलेगा आप कर भी नहीं रहे हैं और दूसरे को कह रहे हैं अरे किसी को कुछ आता है अरे आप ही अकेले इंजीनियर एक बिहार से हैं ऐसी बात नहीं है कि नीतीश कुमार ही एक मात्र पढ़े लिखे व्यक्ति हैं बहुत सारे लोग यहां इनसे ज्यादा पढ़े लिखे और काबिल हैं उनको आप शामिल तो कीजिए आप शामिल ही नहीं करते हैं जब आप किसी से मदद ही नहीं ले रहे हैं किसी की सुनना ही नहीं चाहते हैं एक पुरानी कहावत है वो यक्ष प्रश्न में लिखा हुआ है कि जो राजा दूसरे की सलाह नहीं लेता है उसका क्या होता है उसका क्षय होना ही है आप राजा हैं लोकतांत्रिक तरीके से तो राजा ही हैं बिहार के आप किसी से सलाह ले ही नहीं रहे हैं कि भाई शिक्षा हमारी ध्वस्त है आप जाकर पूछिएगा तो कहते हैं आपको पता है कुछ आता है बिहार की सब शिक्षा सुधार दिए और लोग मरे जा रहे हैं नीचे.