maithili sharan gupta , nar ho na nirash, cbse,
नरहों न निराश करो मनको एक प्रेरणा दायक कविता है।
इस कविता के रचियता राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त है। इस कविता मे कवि ने कर्मवीरता का
पाठ पढ़ाया है। कवि कहते है कि अपने मन को निराश मत करो। हमेशा अपने काम मे लगे रहो।
अपने जन्म का कारण समझो। समय को बैठ कर मत गवाओ।
इस के पहले की अवसर हाथ से निकाल जाए सम्भल जो।