मिलके मुक्कमल हुए हैं, या थे तन्हा भले हम?

Опубликовано: 14 Июль 2026
на канале: Shantanu Nautiyal
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वो रूठी मुझसे ऐसे,
जैसे धरती से रूठे ये सावन,
कह गयी मुझसे
अब आना नए
अफ़साने लिए,

अब इन अल्फ़ाज़ों में वो बात नहीं,
तुम्हारे इश्क़ में वो राग नहीं,
वो कल कल करते
पानी के जैसी
अब ख़नक सी नहीं,

ये मद्धम सा रूठा दिल
उसे कहता है,
ऐ मेरे रूठे हमराही,
नए अफ़साने लेकर
मैं तुम्हारी और आ भी जाऊँ,
पर इन अल्फ़ाज़ों को
मैं बदल नहीं सकता,

ये बेफिक्रे अल्फ़ाज़
अभी भी उस धुन
में खोये हैं,
जिस धुन में तुमने
कभी इस इश्क़ का
ज़िक्र करा था,

न जाने क्यों इन
अल्फ़ाज़ों में वो बात नहीं,
मेरे इश्क़ में वो राग नहीं ,
पूछा मैंने इन चांदनी रातों से ये सवाल,
और वो कह गयी,

वक्त बदला,
पर तू ना बदला,
तेरा इश्क़ सच्चा था,
पर यकीन करने वाला
थोड़ा कानों का कच्चा था,

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