मैं भी बिना कुंडी लगाकर सोती काश में लड़का होती 36 घंटे का कार्य दुश्वार हुआ बहिष्कार हुआ बलात्कार हुआ और उसके बहसीपन से साक्षात्कार हुआ काश उन पुरुषों में भी थोड़े से स्त्रीपन की कोमलता होती अगर मैं एक लड़का होती शायद आज भी जिंदा होती😭
काश मैं भी लड़का होती 😭
तो आज जिन्दा होती 😭
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