विमलचंदजी तीकमचंदजी तलावत की प्रेमपूर्ण स्मृति में
सच्चे धर्म और ज्ञान के प्रतीक, विमलजी के असाधारण जीवन से प्रेरित हो कर मैंने यह गीत लिखा है | इनकी उपस्थिति ने अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया | उनके सिखाये शाश्वत पाठों का चिंतन हम निरंतर करते रहे यही मेरा मूल उद्देश्य हैं |
अपनी जीवन यात्रा में, विमलजी ने करुणा, सय्यम और समझ के अनेकों दृष्टांत प्रस्तुत किये । उन्होंने हमें अपने जीवन में सच्चा ज्ञान और समझ खोजने के लिए सदैव प्रेरित किया। अपने से इतर मत रखने वालों को भी अपना समय और धैर्य उपहार रूप दिया |
आइए हम अपनी साझी स्मृतियों की विरासत को एक दुसरे से बांटें और ख़ास उनसे जो 'विमल' नामक पारस से जीवनभर अछूते रह गए ।