Ujjain Mahakaleshwar mandir;दोस्तों आप अभी जो सुनने जा रहे हैं वो सिर्फ़ एक कहानी नहीं है, ये उस शक्ति की गाथा है, जो समय को भी अपने अधीन कर चुकी है। ये कोई कल्पना नहीं है, ये हकीकत है उस मंदिर की, जहाँ मौत भी माथा टेकती है। नाम है महाकालेश्वर। अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का’ कालों के काल महाकाल की महिमा अद्भुत है। देश के अलग अलग कोने में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग अपनी दिव्यता और सनातन के महत्व के कारण दर्शनीय हैं। इन्हीं मे से मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है। उज्जैन की पवित्र धरती पर स्थित, भगवान शिव का ये रूप, जो केवल पूज्य नहीं, बल्कि भयानक भी है।
हर मंदिर की एक कहानी होती है। लेकिन इस मंदिर की कहानी रहस्य, मृत्यु और चमत्कार के बीच कहीं अटकी हुई है। उज्जैन का महाकाल मंदिर कोई साधारण शिवलिंग नहीं है। ये भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, लेकिन इसका महत्व बाकी सभी से अलग है क्योंकि यहाँ विराजमान हैं कालों के भी काल महाकाल।
कहते हैं, जो इंसान महाकाल का नाम एक बार भी सच्चे मन से ले लेता है, उसके जीवन से डर और मृत्यु खुद पीछे हट जाते है। लेकिन क्या ये सिर्फ़ आस्था है? या इसके पीछे छुपे हैं कुछ ऐसे रहस्य, जिन पर विज्ञान भी खामोश है? इस मंदिर का कई पौराणिक ग्रंथों में काफी सुंदर वर्णन देखने को मिलता है देश-दुनिया से यहां सभी भगवान शिव के दर्शन करने पूरे साल आते हैं।
लेकिन दोस्तों जितना महाकालेश्वर का मंदिर लोगों के बीच Popular है उससे कही ज्यादा ये अपने अंदर कई रहस्यो को समेटे हुए है। तो सवाल ये उठता है कि क्या वजह थी इस मंदिर में हर रोज़ भस्म आरती के राख से नहीं, बल्कि "मृत देह" की राख से की जाती थी? और क्या आज भी यहां पर इंसान की देह की राख से ही भस्म आरती की जाती है? क्या सच में यहां काल भी प्रवेश से पहले अनुमति मांगता है?
क्यों कहते हैं कि यहाँ की आरती देखने मात्र से इंसान की आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं? और वो कौन-सी अनदेखी शक्ति है, जो इस मंदिर से बाहर निकलते ही अदृश्य हो जाती है?
इतिहासकार कहते हैं यह केवल पौराणिक मान्यता है, लेकिन साधु-संत कहते है जिसने महाकाल को देखा नहीं, उसने मृत्यु को कभी समझा ही नहीं। कहीं ये मंदिर समय के नियमों को मोडने वाला कोई द्वार तो नहीं? या फिर ये है एक ऐसा स्थान, जहाँ आत्माएं चैन की तलाश में आती हैं?
और सबसे बडा सवाल क्यों इस मंदिर के कोतवाल काल भैरव को शराब चढाई जाती है? और आश्चर्यचकित कर देने वाली बात तो ये है कि यहां पर चढाई गई सेकड़ो हजारो लीटर शराब आखिर कहां पर गायब हो जाती है? क्या काल भैरव स्वयं इस शराब का भोग कर लेते है? और जब अंग्रेजो ने शराब के इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश करने के लिए मंदिर की खुदाई करवाई तब ऐसा क्या हुआ जिसे देखकर अंग्रेजो के पसीने छूट गये और डर से फिर कभी काल भैरव मंदिर मे प्रवेश भी नही किया।
इतिहास मे ऐसी कौन सी घटनाएं घटी है जिसकी वजह से उज्जैन मे कोई भी मंत्री या प्रधानमंत्री रात नही ठहरता और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परम्परा को किस तरह से तोडा और उन्हें कुछ क्यो नही हुआ? आखिर क्यो इस मंदिर के सामने से बारात को नही गुजारा जाता है?
क्यों भक्तों को अलग-अलग रूप में दर्शन देते हैं महाकाल? इन तमाम सवालों के जवाब आपको आज की इस video में जानने को मिलने वाले है इसलिए आज की ये वीडियो काफी इंटरेस्टिंग होने वाली है। तो इस वीडियो को आप शुरू से लेकर अंत तक पूरा देखें।
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