The EPIC Origins of Holi: Narsingh & Prahlaad | Bass Boosted Trance Narsimha Stotram | 4k 🎧 | ADKVI

Опубликовано: 14 Май 2026
на канале: ADKVI
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Turn up the volume. 🎧 Experience the earth-shattering origins of Holi like never before. From the curse of Jaya and Vijaya to the ultimate wrath of the Narsingh Avatar, this is the epic story of Prahlaad wrapped in an aggressive, bass-boosted EDM Trance rendition of the Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram.

Hi, I’m the creator behind ADKVI. I believe that the stories of our ancestors hold the answers to our modern chaos, but they need a new canvas. My vision is simple yet ambitious: to take the timeless epics, the divine chants, and the profound philosophy of India, and wrap them in a modern, elegant experience. I am not a corporation; I am just one individual trying to connect our generation to our truth. Here, you will find music that calms the mind and stories that ignite the spirit. Let’s explore our legacy together.

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🔥 The Cinematic Climax Drop (Ugram Veeram Mantra):
उग्रं वीरं महाविष्णुम्!
ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्!
नृसिंहं भीषणं भद्रम्!
मृत्युर्मृत्युं नमाम्यहम्!

🎵 Full Lyrics Used in this Track:
Sri Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram (Composed by Adi Shankaracharya)

श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे,
भोगीन्द्र भोग मणि राजित पुण्य मूर्ते ।
योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धि पोत,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

ब्रह्मेन्द्र रुद्र मरुदर्क किरीट कोटि,
सङ्घट्टिताङ्घ्रि कमलामल कान्ति कान्त ।
लक्ष्मी लसत् कुच सरोरुह राजहंस,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार घोर गहने चरतो मुरारे,
मारोग्र भीकर मृग प्रचुरार्दितस्य ।
आर्तस्य मत्सर निदाघ सुदुःखितस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार जाल पतितस्य जगन्निवास,
सर्वेन्द्रियार्थ बडिशाग्र झषोपमस्य ।
प्रोत्कम्पित प्रचुर तालुक मस्तकस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार कूप मतिघोरम् अगाध मूलं,
सम्प्राप्य दुःख शत सर्प समाकुलस्य ।
दीनस्य देव कृपया पदमागतस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार भीकर करीन्द्र कराभिघात,
निष्पीड्यमान वपुषः सकलार्ति नाश ।
प्राण प्रयाण भव भीति समाकुलस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार सर्प विष दिग्ध महोग्र तीव्र,
दंष्ट्राग्र कोटि परिदष्ट विनष्ट मूर्तेः ।
नागारिवाहन सुधाब्धि निवास शौरे,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार वृक्षमघ बीज मनन्त कर्म,
शाखा शतं करण पत्रम् अनङ्ग पुष्पम् ।
आरुह्य दुःख फलितं पततो दयालो,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार सागर विशाल कराल काल,
नक्र ग्रह ग्रसित निग्रह विग्रहस्य ।
व्यग्रस्य राग निचयोर्मि निपीडितस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार सागर निमज्जन मुह्यमानं,
दीनं विलोकय विभो करुणानिधे माम् ।
प्रह्लाद खेद परिहार परावतार,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

संसार घोर गहने चरतो मुरारे,
मारोग्र भीकर मृग प्रचुरार्दितस्य ।
आर्तस्य मत्सर निदाघ सुदुःखितस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

बद्ध्वा गले यम भटा बहु तर्जयन्तः,
कर्षन्ति यत्र भव पाश शतैर् युतं माम् ।
एकाकिनं परवशं चकितं दयालो,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

लक्ष्मी पते कमल नाभ सुरेश विष्णो,
यज्ञेश यज्ञ मधुसूदन विश्वरूप ।
ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

एकेन चक्रमपरेण करेण शङ्खम्,
अन्येन सिन्धु तनयाम् अवलम्ब्य तिष्ठन् ।
वामेतरेण वरदाभय पद्म चिह्नम्,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

अन्धस्य मे हृत विवेक महाधनस्य,
चोरैर् महाबलिभिर् इन्द्रिय नामधेयैः ।
मोहान्धकार कुहरे विनिपतितस्य,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

प्रह्लाद नारद पराशर पुण्डरीक,
व्यासादिभिर् भागवत पुङ्गवैर् हृन्निवास ।
भक्तानुरक्त परिपालन पारिजात,
लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् !

लक्ष्मी नृसिंह चरणाब्ज मधुव्रतेन,
स्तोत्रं कृतं शुभकरं भुवि शङ्करेण ।
ये तत् पठन्ति मनुजा हरि भक्ति युक्ताः,
ते यान्ति तत् पद सरोजम् अखण्डरूपम्...

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम्...
मृत्युर्मृत्युं... नमाम्यहम्।

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