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मिर्जापुर 3 फैंस को पसंद नहीं आया? जानिए क्यों! #कमजोर कहानी #बेकार (Bekar - Useless)
पिछले हफ्ते ही मिर्जापुर का सीजन 3 रिलीज हुआ है लेकिन ना तो ये पहले जैसे धूम मचा पाया है और ना ही दर्शकों को कुछ खास महसूस करा पाया है। आइए जानते हैं वो क्या वजहें हैं जिनकी वजह से फैंस इस सीजन से खुश नहीं हैं।
क्या कमियां रहीं Mirzapur 3 में?
अनजाना संसार: पहले दो सीजन में मिर्जापुर के मुख्य और सहायक किरदारों को स्थापित किया गया था। मगर इस बार वही सहायक किरदार कहानी को आगे बढ़ा रहे हैं। इस दुनिया को समझने में दर्शकों को करीब 3 एपिसोड लग जाते हैं, जो उन्हें बोरियत महसूस कराता है।
बंदूक और गुंडों की दुनिया से भर चुके हैं हम! 2018 में आया था मिर्जापुर का पहला सीजन, उस वक्त OTT प्लेटफॉर्म्स पर कहानियों का अंबार लग रहा था। तब से लेकर अब तक कई ऐसी वेब सीरीज आ चुकी हैं जिनमें खून-खराबा और गाली-ग्लोच ज्यादा है। दर्शक अब ऐसी कहानियों से थक चुके हैं।
सेंसरशिप का साया: इस बार दर्शकों को लगा कि मिर्जापुर को थोड़ा फीका कर दिया गया है। याद है अमेज़न प्राइम की वेब सीरीज तांडव को किस तरह से परेशानियों का सामना करना पड़ा था? कड़े नियमों और सरकारी दखल के चलते पहले की सीजन जैसी बोल्ड और बेबाक कहानी पेश करना मुश्किल हो गया है। मिर्जापुर 3 में भी नग्नता, गाली और खून-खराबे को कम कर दिया गया है।
कम स्क्रीनटाइम मिला मुख्य किरदारों को! मुन्ना भैया की मौत के बाद कबीर और गुड्डू भैया की जगह खाली रह गई। पंकज त्रिपाठी तो सिर्फ 5-6 सीन्स में ही नजर आते हैं और अली फजल को भी ज्यादा स्क्रीनटाइम नहीं मिला है।
कमजोर विलेन! शो में सबसे ज्यादा निराश करने वाली बात रही एक्टिंग। विजय वर्मा, अली फजल और पंकज त्रिपाठी तीनों ही कलाकार उतने दिलचस्पी से अभिनय नहीं करते दिखे। हालांकि श्वेता त्रिपाठी अपने शानदार अभिनय से प्रभावित करती हैं। मगर जिस किरदार ने सबसे ज्यादा निराश किया वो हैं अंशूम शर्मा द्वारा निभाया गया शरद शुक्ला। ये सीजन का विलेन है जिसका किरदार बहुत ही सपाट और नीरस है। उसके किरदार में कोई गहराई नहीं दिखाई गई और कमज़ोर लेखन की वजह से उनका अभिनय भी प्रभावित हुआ है।
धीमी शुरुआत! भले ही आप ऊपर बताई गई सभी बातों को माने, फिर भी ये सीजन कभी गति नहीं पकड़ पाता। कई ऐसे लंबे-लंबे सीन्स हैं जो आपको नींद तक ले जा सकते हैं।
लेकिन कुछ चीजें अच्छी भी लगीं...
कहानी में नयापन लाने की कोशिश: ये सीजन हमें उन किरदारों से जोड़ने की कोशिश करता है जिन्हें हम कम जानते थे। हम एक ही सीन में लाला के लिए खुश हो लेते हैं और दूसरे सीन में रहीम के लिए दुखी हो जाते हैं। कई चौंकाने वाले ट्विस्ट भी हैं। ये सब कुछ तभी हो पाया है क्योंकि हमें इन किरदारों के बारे में ज्यादा बताया गया है। यही वजह है कि मेन लीड्स को कहानी से थोड़ा दूर रखा