तीसरी कसम - फणीश्वरनाथ रेणु जी की कहानी पर आधारित फिल्म की समीक्षा - लेखन एवं प्रस्तुति- अशोक मर्डे

Опубликовано: 10 Сентябрь 2026
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तीसरी कसम - फणीश्वरनाथ रेणु जी की कहानी पर आधारित फिल्म की समीक्षा - लेखन एवं प्रस्तुति- अशोक मर्डे
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Teesari Kasam हिंदी फिल्म
शैलेन्द की फिल्म
तीसरी कसम फणीश्वर नाथ रेणु की काफी चर्चित कहानी है। जो भी फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी को पढ लेता है वह इस कहानी पर आधारित फिल्म को देखता है। इस फिल्म की विशेषता बताई जाए तो ग्रामीण जन जीवन, निश्छल प्रेम, श्रवणीय गीत, अच्छी कथा, जीवंत अभिनय आदि बातों का उल्लेख किया जा सकता है। भारतीय सामान्य जन का निश्छल प्रेम इस फिल्म में अभिव्यक्त हुआ है। जो कहानी का लेखक है वही इस फिल्म के लिए संवाद भी लिखता है यह इसकी खास विशेषता है। इस फिल्म का निर्माण 1966 में हुआ है। तब की स्थिति का बडा सुंदर चित्रण इस फिल्म में देखने को मिलता है। 1966 के समय मनोरंजन के साधन न होने के कारण नौटंकी जैसे ही मनोरंजन के साधन हुआ करते थे। इसी नौटंकी को प्रस्तुत करनेवाली नायिका के व्यक्तित्व तथा एक इमानदार ग्रामीण के सच्चे व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति इस फिल्म में हुई है। फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम इस कहानी पर आधारित यह फिल्म है। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म को 1966 का सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है। उसी प्रकार 1967 का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।
इस फिल्म की प्रमुख भूमिका राज कपूर और वहेदा रहमान ने की है। राज कूपर ने हीरामन की भूमिका कर एक इमानदार और चरित्रवान गाडीवान की भूमिका निभाई है। वहेदा रहमान ने हीरबाई की भूमिका निभाई है। हीराबाई एक सुंदर व्यक्तित्व की नारी है। जो नौटंकी कंपनी में नाचगाना कर लोगों का मनोरंजन करती है। उसी प्रकार इस फिल्म में समीर चतुर्वेदी, सी. एस. दुबे, आदि ने भी अभिनय किया है। इस फिल्म के लिए शैलेंद्र का योगदान अद्वितीय है वे निर्माता के रूप में सफल रहे है। फिल्म के गीत शैलेंद्र और हसरत जयपुरी ने लिखे है। फिल्म का नृत्य दिग्दर्शन लच्छू महाराज ने किया है। इस फिल्म के निर्देशक बासु भटटाचार्य रहे है। कथा और संवाद लेखन की भूमिका स्वयं फणीश्वरनाथ रेणु ने निभाई है। इस फिल्म को संगीत शंकर जयकिशन ने दिया है। लगभग 159 मिनटों की यह फिल्म है। सुमधुर संगीत, खुबसूरत अदाकारी से सज्जित फिल्म में सादगी है, सौंदर्य है, सह्दयता है और समर्पण है।


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