खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं॥
तेहिं अवसर सुनि सिवधनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥
खलबली देखकर जनकपुरी की स्त्रियाँ व्याकुल हो गईं और सब मिलकर राजाओं को गालियाँ देने लगीं। उसी मौके पर शिव के धनुष का टूटना सुनकर भृगुकुलरूपी कमल के सूर्य परशुराम आए।
देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने॥
गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा॥
इन्हें देखकर सब राजा सकुचा गए, मानो बाज के झपटने पर बटेर लुक (छिप) गए हों। गोरे शरीर पर विभूति (भस्म) बड़ी फब रही है और विशाल ललाट पर त्रिपुंड विशेष शोभा दे रहा है।
लक्ष्मण परशुराम संवाद
सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिस बस कछुक अरुन होइ आवा॥
भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते॥
सिर पर जटा है, सुंदर मुखचंद्र क्रोध के कारण कुछ लाल हो आया है। भौंहें टेढ़ी और आँखें क्रोध से लाल हैं। सहज ही देखते हैं, तो भी ऐसा जान पड़ता है मानो क्रोध कर रहे हैं।
बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला॥
कटि मुनिबसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें॥
बैल के समान (ऊँचे और पुष्ट) कंधे हैं; छाती और भुजाएँ विशाल हैं। सुंदर यज्ञोपवीत धारण किए, माला पहने और मृगचर्म लिए हैं। कमर में मुनियों का वस्त्र (वल्कल) और दो तरकस बाँधे हैं। हाथ में धनुष-बाण और सुंदर कंधे पर फरसा धारण किए हैं।
दो० - सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरूप।
धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप॥
शांत वेष है, परंतु करनी बहुत कठोर हैं; स्वरूप का वर्णन नहीं किया जा सकता। मानो वीर रस ही मुनि का शरीर धारण करके, जहाँ सब राजा लोग हैं, वहाँ आ गया हो॥
देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला॥
पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥
परशुराम का भयानक वेष देखकर सब राजा भय से व्याकुल हो उठ खड़े हुए और पिता सहित अपना नाम कह-कहकर सब दंडवत प्रणाम करने लगे
लक्ष्मण परशुराम संवाद रामायण
लक्ष्मण परशुराम संवाद रामलीला
लक्ष्मण परशुराम संवाद राजन जी महाराज
लक्ष्मण परशुराम संवाद बृजेश शास्त्री
लक्ष्मण परशुराम संवाद राधेश्याम रामायण
लक्ष्मण परशुराम संवाद रामायण रामानंद सागर
लक्ष्मण परशुराम संवाद राजेश्वरानंद
लक्ष्मण परशुराम संवाद गायत्री ठाकुर गुलाब शर्मा
लक्ष्मण परशुराम संवाद कुमार विश्वास
लक्ष्मण परशुराम संवाद आधार चेतन की आवाज में
लक्ष्मण परशुराम संवाद रामानंद सागर
लक्ष्मण परशुराम संवाद सुरेश अवस्थी
लक्ष्मण परशुराम संवाद रामायण चौपाई
लक्ष्मण परशुराम संवाद राठौर कैसे
angad ravan samvad
ramayan episode 8
siya ke ram parshuram part 2
laxman shakti
siya ke ram sita swayamvar
surdas ke pad class 10
ravan banasur samvad
sita swayamvar song
class 10 hindi chapter 3
utsah at nahi rahi hai class 10
lakshman parshuram samvad ramayan
lakshman parshuram samvad brijesh shastri
lakshman parshuram samvad ramleela
lakshman parshuram samvad class 10th
lakshman parshuram samvad rajan ji maharaj
lakshman parshuram samvad ramanand sagar
lakshman parshuram samvad radheshyam ramayan
lakshman parshuram samvad gayatri thakur
lakshman parshuram samvad rajeshwaranand ji
lakshman parshuram samvad shrimad ramayan
lakshman parshuram samvad new ramayan
lakshman parshuram samvad class 10
lakshman parshuram samvad surjan chetan
lakshman parshuram samvad chaupai
lakshman parshuram samvad ramayan mein
फाग रामायण लक्ष्मण परशुराम संवाद
lakshman parshuram samvad ramayan ramanand sagar
lakshman parshuram samvad ramayan chaupai
lakshman parshuram samvad ramayan serial
lakshman parshuram samvad ramayan episode
लक्ष्मण परशुराम संवाद रामायण वीडियो में
parshuram lakshman samvad ramayan siya ke ram
parshuram lakshman samvad ramayan ramleela
lakshman parshuram samvad radheshyam ramayan
ram lakshman parshuram samvad ramayan episode
parshuram lakshman samvad radheshyam ramayan ka
faag ramayan lakshman parshuram samvad
जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी॥
जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा॥
परशुराम हित समझकर भी सहज ही जिसकी ओर देख लेते हैं, वह समझता है मानो मेरी आयु पूरी हो गई। फिर जनक ने आकर सिर नवाया और सीता को बुलाकर प्रणाम कराया।
आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गईं सयानीं॥
बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई॥
परशुराम ने सीता को आशीर्वाद दिया। सखियाँ हर्षित हुईं और (वहाँ अब अधिक देर ठहरना ठीक न समझकर) वे सयानी सखियाँ उनको अपनी मंडली में ले गईं। फिर विश्वामित्र आकर मिले और उन्होंने दोनों भाइयों को उनके चरण कमलों पर गिराया।
रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा॥
रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन॥
(विश्वामित्र ने कहा -) ये राम और लक्ष्मण राजा दशरथ के पुत्र हैं। उनकी सुंदर जोड़ी देखकर परशुराम ने आशीर्वाद दिया। कामदेव के भी मद को छुड़ानेवाले राम के अपार रूप को देखकर उनके नेत्र चकित (स्तंभित) हो रहे।