हट कर बैठा ll रामधारी सिंह दिनकर ll कविता

Опубликовано: 06 Сентябрь 2026
на канале: Umesh Arya Science
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हट कर बैठा ll रामधारी सिंह दिनकर ।। कविता









हठ कर बैठा चाँद एक दिन,
माता से यह बोला।
सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।
सन-सन चलती हवा रात भर जाड़े से मरता हूँ।
ठिठुर-ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
यह रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता हैl