पुरुषोत्तम चंद्राकर | दया मया के छाव | लोकरंजनी | राजिम मेला 2024
*दया मया के छांव* गीत एक छत्तीसगढ़ी लोकगीत है जिसे पुरुषोत्तम चंद्राकर ने प्रस्तुत किया है। इस गीत का मुख्य भाव प्रेम, दया, और ममता है। गीत के बोल और धुन में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक मिलती है।
गीत का विवरण:
1. **शीर्षक**: दया मया के छांव
2. **गायक**: पुरुषोत्तम चंद्राकर
3. **शैली**: छत्तीसगढ़ी लोकगीत
4. **प्रस्तुति**: राजिम मेला 2024, लोकरंजनी
गीत की विशेषताएँ:
**बोल**: गीत के बोल बहुत ही सरल और प्रभावशाली हैं, जो श्रोताओं के दिल को छू जाते हैं।
**संगीत**: संगीत में पारंपरिक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया गया है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करते हैं।
**भावना**: गीत में प्रेम, दया और ममता की भावना प्रमुख रूप से झलकती है, जो समाज में सामंजस्य और मानवता को बढ़ावा देती है।
राजिम मेला:
राजिम मेला छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक मेला है, जहां लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियाँ की जाती हैं। इस मेले में देश-विदेश से लोग आते हैं और छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति का आनंद लेते हैं।
इस गीत और पुरुषोत्तम चंद्राकर के अन्य प्रस्तुतियों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए, आप राजिम मेला 2024 की आधिकारिक वेबसाइट या सोशल मीडिया चैनलों पर जा सकते हैं।
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