संघगीत | खेल कूद कर बने, वीर वर महान है | Khel Kud Kar Bane Veer Var Mahan hain

Опубликовано: 21 Июль 2026
на канале: dp bharat
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खेल की विशेषता (संघगीत)
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खेल कूद कर बने, वीर वर महान है|
खेल के प्रकार सब, सद्गुणों की खान है||

शावकों के साथ वह, बालकों सा खेलता|
गिन रहा था दांत वह, हाथ मुंह में ठेलता ||
बालवीर से जुड़ा, भरत भू का नाम है ||१||
खेल के प्रकार सब.....

साथियों के संग वह, खड़ग शूल भेदता |
जय भवानी नाद से, दिगदिगंत गूंजता ||
वह शिवा उड़ा सके, जय-विजय निशान है ||२||
खेल के प्रकार सब.....

घर में भूमि खोदकर, राह जो बना रहा |
जैक को उतार दो, स्वप्न वह सँजो रहा ||
केशव का मंत्र था, संगठन ही प्राण है ||३||
खेल के प्रकार सब.....

जो कभी न खेलता, वह कभी खिला नहीं |
जो कभी ना दौड़ता, वह कभी बड़ा नहीं ||
जो रुका, वही मिटा, सृष्टि का विधान है ||४||
खेल के प्रकार सब.....

वृद्ध हो या बाल जन, किशोर या जवान गण |
खेल ही निखरता, स्वस्थ तन प्रसन्न मन ||
जीत में है मान तो, हार में भी आन है ||५||
खेल के प्रकार सब.....

एक को अनेक से, खेल तंत्र जोड़ता |
भिन्न भी अभिन्न है, खेल की विशेषता||
खेल से ही हो सका, समर व्यूह ज्ञान है ||६||
खेल के प्रकार सब.....

खेल कूद कर बने, वीर वर महान है|
खेल के प्रकार सब, सद्गुणों की खान है||