जहानाबाद समाचार//13 नवंबर 2005 की रात थी वो. जहानाबाद शहर बिहार के अन्य शहरों की तरह अँधेरे में डूबा हुआ था. एकदम सन्नाटा पसरा हुआ था. पर सब कुछ शांत नहीं था. बल्कि ये तूफ़ान के पहले की शांति थी. लगभग एक हज़ार पैर ख़ामोशी के साथ एक लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे, अचानक पूरा शहर गोली और बम के धमाकों से गूंज उठा और उनकी रौशनी से जहानाबाद जेल नहा उठा. नक्सलियों ने एक साथ जेल और पुलिस थाना पर हमला बोलकर 200 नक्सलियों को छुड़ा लिया था. पूरी प्लानिंग के साथ हमले के कारण पुलिस और प्रशासन को संभलने तक का मौका तब नहीं मिला था. माओवादियों द्वारा अपने साथियों को छुड़ाने के लिए किए गये हमले में दो कैदी और एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गयी. माओवादियों का नेता अजय कानू जेल से उड़ चुका था और साथ में दो लाशें और बिछी थीं, रणवीर सेना के दो प्रमुख नेता.
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