शबरी एक भक्तिभाव से भरी हुई स्त्री थी जो श्रीराम के भक्त थे। उसका कथा रामायण में उल्लेख है।
श्रीराम अपनी वनवास के दौरान पंचवटी वन में एक दिन भ्रमण कर रहे थे। उनकी यात्रा में एक समय, शबरी नामक स्त्री ने राम और लक्ष्मण का स्वागत किया। शबरी ने भगवान से मिलकर उनके पैरों को धोया, उन्हें बैठाया और पूजा की। उसने अपनी पूजा में अपने सभी भक्तिभावों को समर्पित किया और अपनी प्रेम भावना से भगवान का सेवन किया।
श्रीराम ने शबरी की भक्ति को देखकर उससे पूछा, "तुमने मुझे यह सब क्यों किया?" शबरी ने उत्तर दिया, "भगवान, मैंने तुम्हें अपने पूरे मन और भक्ति से पूजा है। मैंने यह सब केवल इस आशा के साथ किया है कि तुम मेरी भक्ति को स्वीकार करोगे।"
श्रीराम ने शबरी की प्रेम भरी भक्ति को देखकर उसे आशीर्वाद दिया और उसकी भक्ति को स्वीकार किया। इसके बाद, शबरी ने राम और लक्ष्मण को अनेक प्रकार के फलों का प्रसाद दिया जो उसने स्वयं चुनकर उन्हें प्रस्तुत किया था।
श्रीराम के साथ शबरी की इस मीठी भक्ति व आदरभाव की कहानी ने हमें यह सिखाता है कि भगवान के साथ भक्ति में निरंतर प्रेम और समर्पण से ही असली साक्षात्कार होता है।
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