Shri Pagal Baba Temple, Vrindavan ll श्री पागल बाबा मंदिर,?
एक जज कैसे बने "पागल बाबा" :
किवंदती के अनुसार, काफी साल पहले बांके बिहारी मंदिर का एक ब्राह्मण होता है, जिसने एक महाजन से पैसा उधार ले रखा था। इसके बदले वह हर महीने महाजन को ब्याज के साथ पैसे दे आता है। आखिरी किश्त के समय महाजन ने पैसे को लेकर खूब नौटंकी की और ब्राह्मण से कहा कि तुमने कोई भी पैसा नहीं चुकाया और फिर उसने अदालत में केस कर दिया। इस पर जब जज ने बुजुर्ग ब्राह्मण से पूछा कि उसके पास कोई प्रमाण है कि उसने महाजन को पैसे दिए हैं तो उसने कहा कि उसके लिए गवाही देने बांके बिहारी आएंगे और उसने बांके बिहारी मंदिर का पता लिखवा दिया। अगली अदालती कार्यवाही के दिन एक बुजुर्ग व्यक्ति अदालत में आया और सारी तारीखों का विवरण दिया, जिस-जिस ब्राह्मण ने पैसे चुकाए थे और साथ ही ये भी कहा वह उस ब्राह्मण के साथ ही रहता था। इस महाजन का रजिस्टर चेक किया गया, जो सही साबित हुआ।
इस पर जज ने ब्राह्मण से पूछा कि ये बुजुर्ग कौन था और कहा रहता है? तो ब्राह्मण ने कहा कि यही तो बांके बिहारी हैं और ये तो सभी जगह होते हैं। इस पर जज अपने कार्य से इस्तीफा देकर सन्यासी रूप में कृष्ण की खोज में निकल पड़ा, जिसके बाद उसे लोग पागल बाबा कहने लगे और वह इसी नाम से विख्यात हुआ। साल 1969 ईस्वी में पागल बाबा ने मंदिर निर्माण के लिए योजना बनाई और मथुरा मार्ग पर संगमरमर से बना नौ मंजिला लीलाधाम का निर्माण कराया, जिसे पागल बाबा मंदिर के नाम से जाना जाता है।
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