Ghumakkad | यहाँ पर होती हैं मुरादें पूरी | नगरकोट की देवी माँ वज्रेश्वरी

Опубликовано: 05 Сентябрь 2026
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श्री वज्रेश्वरी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित है। यह एक शक्ति पीठ है जहा माँ सती का बायां वक्षस्थल गिरा था। इसलिए इसे स्तनपीठ भी कहा गया है और स्तनपीठ भी अधिष्ठात्री वज्रेश्वरी देवी है। स्तनभाग गिरने पर वह शक्ति जिस रूप में प्रकट हुई वह वज्रेश्वरी कहलाती है। इस मंदिर के अग्रभाग में प्रवेश द्वार से जुड़े मुखमंडप और सभामंडप के शीर्ष भाग पर बने छोटे-छोटे गुम्बद, शिखर, कलश और मंदिर के स्तम्भ समूह पर मुगल और राजपूतकालीन शिल्प का प्रभाव दिख पड़ता है।
वज्रेश्वरी मंदिर के में भद्रकाली, एकादशी और वज्रेश्वरी स्वरूपा तीन पिण्डियों की पूजा की जाती है। लोगो का मानना है कि इस पर चढ़ाए गए जल को आसन्नप्रसू स्त्री को पिलाने से शीघ्र प्रसव हो जाता है। यही जल गंगा जल की तरह आखरी साँसों में मुक्ति दिलवाता है ।
इस मंदिर में जालंधर दैत्य का संहार करती देवी को रूद्र मुद्रा में दर्शाती एक मूर्ति है। इसमें देवी द्वारा दानव को चरणों के नीचे दबोचा हुआ दिखाया है। इस मंदिर को प्राचीन काल में बहूत मुगलो ले लुटा और फिर पुनः स्थानीय राजाओ ने मंदिर को फिर से समर्ध किया |
यहाँ देवी का वक्ष और कान का हिस्सा कांगड़ा की धरती पर गिरकर वज्र के समान कठोर हो गया था। उसी स्थान पर वज्रेश्वरी देवी का प्राकट्य हुआ। वज्रेश्वरी देवी को शत्रुओं पर विजय पाने के लिए भी पूजा जाता रहा है।