रवि एक छोटे से गाँव में रहता था। उसे पुरानी और अजीब चीज़ों में बहुत दिलचस्पी थी।दुकान के बाहर एक बोर्ड लटक रहा था—"दादी का रहस्यमयी घड़ीसाज"। एक दिन, गाँव के कोने में बनी एक पुरानी दुकान पर उसकी नज़र पड़ी।
रवि उत्सुकता से दुकान में दाखिल हुआ। अंदर एक बूढ़ी दादी बैठी थीं, जिनके चारों ओर अलग-अलग तरह की घड़ियाँ थीं—कुछ हवा में तैर रही थीं, कुछ खुद ही समय बदल रही थीं।
"आओ, बच्चा!" दादी मुस्कुराकर बोलीं। "क्या तुम समय को उल्टा घुमा सकते हो?"
रवि को लगा कि यह मज़ाक था, लेकिन जैसे ही उसने एक घड़ी को छुआ, अचानक उसके चारों ओर की दुनिया पीछे की तरफ चलने लगी! लोग उल्टे चलने लगे, पेड़ अपनी पुरानी स्थिति में लौटने लगे, और रवि ने खुद को सुबह के वक्त खड़ा पाया!
हड़बड़ाकर उसने घड़ी को वापस रखा। सब कुछ फिर से सामान्य हो गया।
"समय बहुत शक्तिशाली है," दादी बोलीं। "अगर इसे ठीक से नहीं संभाला गया, तो बड़ी अजीब घटनाएँ हो सकती हैं!"
रवि ने उस दिन तय किया कि वह कभी समय से खिलवाड़ नहीं करेगा। लेकिन दुकान की रहस्यमयी घड़ियों को वह कभी नहीं भूल सका।
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