गोरी जाड़े में तुमाय | बिना चैन परत नैया | अरविन्द कुशवाहा, रामदेवी माशूम | बुंदेली लोकगीत

Опубликовано: 11 Сентябрь 2026
на канале: niharika digital studio birdha
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यूट्यूब टाइटल: "तुमाय बिना चैन परत नैया | अरविन्द कुशवाहा, रामदेवी माशूम | बुंदेली लोकगीत | गोरी जाड़े में"

यूट्यूब डिस्क्रिप्शन: "तुमाय बिना चैन परत नैया" एक पारंपरिक बुंदेली लोकगीत है जिसे अरविन्द कुशवाहा और रामदेवी माशूम ने खूबसूरती से प्रस्तुत किया है। यह गीत सर्दी के मौसम में प्रेमिका की व्यथा और अपने प्रेमी के बिना चैन ना मिलने की भावना को दर्शाता है। गीत के बोल और धुन बुंदेली संस्कृति की मिठास को महसूस कराते हैं।

इस वीडियो में:

गायन: अरविन्द कुशवाहा और रामदेवी माशूम

शैली: बुंदेली लोकगीत

भाषा: बुंदेली

थीम: प्रेमिका की व्यथा, सर्दी का मौसम


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