प्रेमचंद जी की बहुत सी रचनाओं में दो बैलों की कथा भी एक अदभुत रचना है। उनका जन्म सन् 1880 में बनारस के लमही गांव में हुआ था। उनका असली नाम धनपत राय था। उनका देहांत सन 1936 में हो गया था। इस कहानी के माध्यम से उन्होंने इंसानों और जानवरों के आपसी रिश्ते को समझने की कोशिश की है।
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