एम्स भुवनेश्वर के ग्राउंड पर अपने परिवार के अन्य लोगों के साथ बैठे रवि न्यूज़लॉन्ड्री से कहते हैं, ‘‘मेरे टोले के चार लोग #coromandelexpress से चेन्नई जा रहे थे. एक का इलाज चल रहा है. तीन की मौत हो गई है. दो का शव भी मिल गया है. मेरे पिता का शव अब तक नहीं मिला है. मैं तो एक दिन पहले ही यहां आया हूं. मेरे परिवार के सदस्य बीते छह दिनों से उन्हें तलाश रहे थे.’’
रवि, मल्लाह समुदाय से हैं. इनके पिता और दूसरे अन्य लोग चेन्नई में सीमेंट की फैक्ट्री में काम करने जा रहे थे. क्या यहां बिहार सरकार के अधिकारियों से आपको मदद मिली? वे इसका जवाब ना में देते हैं.
रवि और या उनके दूसरे साथी हिंदी भी ठीक से नहीं बोल पाते हैं. ज्यादातर ईट-भट्टों पर काम कर अपना जीवन यापन करते हैं. ऐसे में उनकी मदद के लिए नगर पार्षद बुंदेल पासवान उनके साथ आए हुए हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए पासवान कहते हैं, ‘‘यहां आने के बाद मुझसे सबसे ज़्यादा दुःख यह हुआ कि #bihargovernment का कोई अधिकारी नहीं हैं. यहां लोगों के लोगों को हमारी भाषा समझ में नहीं आ रही है और उनकी हमें. अगर अधिकारी होते तो वे हमारी बात रखते.’’
ऐसा सिर्फ रवि या मुसाफिर सहनी नहीं कहते हैं. एम्स के बाहर अपनों की तलाश में भटक रहे दस लोगों ने ऐसा कहा.
देखिए यह रिपोर्ट -
#odishatrainaccidentupdate
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