In this video I am explaining about four new labour Codes comes into existence by Modi government, in which the object is labour reforms and easy of doing business.
Labour is fall under the concurrent list of the Indian constitution where there are Central approximately 48laws, 100laws an approximately state of labour laws,
There are four codes on wages quotes on Industrial relation quotes on social securities and code of occupational and safety health and working condition.
Code on wages is based on payment of wages act, minimum wages act ,payment of bonus Act and equal remuneration act. This act is covered organised as well as unorganised and gig and free laans workers. This act governs the floor wages on national level. The definition of wages in all acts are similar.
Occupational health and safety working condition there are 13 labour laws. This act is applicable 10 और मोर workers workers can not goin civil Court main appeal nahin hogi High Court appeal ke liye Jana hoga.
Industrial relation code. Is lockout or strike or termination related to the work worker Trade union act industrial disputes act and standing order act. There is a specific provision 14 days notice in advance is given is mandatory. State government notify by simple notification 300 to 500 workers.
the government face power to modify change or differ the judgement given by the industrial tribunal.
Code on social security act Hindi PF ,ESI, maternity, gratuity. The gratuity Act is applicable to the contract labour also.
The employee can change the share in provident fund scheme.
इस वीडियो में जो बताया जा रहा है कि भारत में अभी तक प्रचलित सारे श्रम कानून काफी पुराने हैं जिनको बदलने के लिए काफी प्रयास हुए सेकंड लॉ कमीशन लाया गया इसकी रिपोर्ट के आधार पर मोदी सरकार ने 44 पुरानी श्रमिक लॉस में की जगह 29 श्रम विधियां इन कोड़ स रखी गई है। जिसमें 29 वीडियो में से चार कोड्स बना दिए ,जिसमें इक्वल रैम्यूनरेशन एक्ट 1976 पेमेंट का बोनस एक्ट 1965 पेमेंट का बिजनेस एक्ट 1936 और मिनिमम वेजेस एक्ट 1948 को मिलाकर कोड ओंन वेजेस बनाया था ,जिन्हें कंसोलिडेटेड किया गया। सरकार भारत के संविधान के कॉन्करेंट लिस्ट के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार लेबर कानून बना सकती है।
इसी प्रकार कोड ओंन इंडस्ट्रियल रिलेशन एक्ट 2020 जिसमें इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947, ट्रेड यूनियन एक्ट 1926, तथा इंडस्ट्रियल एंप्लॉयमेंट स्टैंडिंग ऑर्डर कर्मचारियों की सेवा शर्तों को गवर्न करता है, इसमें तीन लेबर लॉज रखे गए।
ई सी प्रकार सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में 9 लेवर लॉस हो कंसोलिडेटेड किया गया दिन में इपीएफ एक्ट 1952, इसीअधिनियम 1948 एंप्लाइज कंपनसेशन एक्ट 1923 एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज कंपलसरी नोटिफिकेशन का वैकेंसी एक्ट 1959 मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 पेमेंट का ग्रेच्युटी एक्ट 1972 सिने वर्कर्स वेलफेयर एक्ट बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर शेयर्स एट 1995 थे अनोर्गनाइज्ड वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी एक्ट 2008 है
इसी प्रकार ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 में 13 लेवर लॉज को कंसोलिडेटेड किया गया जिनमें फैक्ट्री एक्ट 1948 ,माइन्स एक्ट 1952, द डॉक वर्कर सेफ्टी हेल्थ एंड वेलफेयर एक्ट 1986, बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स रेगुलेशन ऑफ़ एंप्लॉयमेंट एंड कंडीशन ऑफ़ सर्विस एक्ट 1986, प्लांटेशन लेबर एक्ट 1951 थे कांट्रैक्ट लेबर रेगुलेशन एंड अबोलिशन एक्ट 1970 इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कमैन रेगुलेशन ऑफ़ एंप्लॉयमेंट एंड कंडीशन का सर्विस एक्ट 1979 ,द वर्किंग जनरल स्टैंड अदर न्यूज़ पेपर एम्पलाइज कंडीशन ऑफ़ सर्विस एंड मिसलेनियस प्रोविजन 1955 वर्किंग जनरलिस्ट फिक्शन का रेट्स ऑफ़ बिज़नेस 1958 द मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट 1961 , सेल्स प्रमोशन एम्पलाइज कंडीशन ऑफ़ सर्विस एक्ट 1976 बीड़ी सिगार वर्कर्स कंडीशन ऑफ़ एंप्लॉयमेंट एक्ट 1966 वर्कर्स एंड सिनेमा थिएटर एक्ट 1961 सम्मिलित है।
इसी प्रकार वेजेस एक डेफिनेशन सभी कोड में रखी गईहै। ग्रेच्युटी का अमाउंट हायर साइड में मिलेगा फ्री एम्पलाई एनुअल चेकअप होगा। एंपलॉयर 48 घंटे एक वीक में काम लगातार जिसमें वह लगातार भी काम लेता है तो 8 घंटे से ज्यादा काम लेने पर ओवर टाइम देना होगा ।ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी चेकअप का प्रोविजन साल के अंत में बैलेंस लाइव इन कैश कर सकता है,वेजेस कोड में 48 घंटे में फूल और फाइनल पेमेंट करना होगा फिक्स टाइम अपॉइंटमेंट वर्कर्स को भी 1 साल की ग्रेच्युटी देनी होगी, एंप्लॉयर को ग्रेच्युटी इन शॉर्ट अवधी जिसमें 5 वर्ष की सेवाकरनी होगी उन कर्मचारियों को भी ग्रह छुट्टी का लाभ दिए जाने संबंधी व्यवस्था माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दी है।। विभिन्न अधिनियमों में अलग-अलग रजिस्ट्रेशन लेने की जगह एक एस्टेब्लिशमेंट का रजिस्ट्रेशन लेना होगा। लॉकआउट ,स्ट्राइक में 14 दिन का प्रायर नोटिस देना होगा। ऑर्गेनाइज्ड कर्मी के अलावा अनोर्गनाइज्ड नॉन ऑर्गेनाइज्ड तथा फ्रीलांस वर्कर्स को भी वेजेस में किया गया नेशनल लेवल पर फ्लोर वेजेस होगा, वेजेस की आम डेफिनेशन होगी। ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी वर्किंग कंडीशन में 10 कर्मी से ज्यादा पर नियम लागू होगा ,सिविल कोर्ट में अपील न होकर हाई कोर्ट में अपील होगी।
इस प्रकार नए कोड में कुछ आम बदलाव लाने का प्रयास किया गया है।
#4 नई लेबरकोड कौन से हैं।
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