// New श्रम कानून क्या हैं

Опубликовано: 07 Сентябрь 2026
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आज की इस लाइव एपिसोड में में चार मजदूर कोड्स जो मोदी सरकार द्वारा 2019-20 में लाए हैं जिससे लेबर रिफॉर्म हो तथा ईजी आफ डूइंग बिजनेस हो सके इस उद्देश्य से इन्हें लोकसभा राज्यसभा में पास करके अधिनियम का रूप राष्ट्रपति की सहमति के बाद दिया गया है गजट नोटिफिकेशन भी हो चुका 2002 में सेकंड लेबर कमिश्नर द्वारा इस तरह के रिफॉर्म लाने का सुझाव दिया गया था।
मोदी सरकार ने श्रमिकों के नियोजन में में आने वाली कठिनाई को देखते हुए 4 नए लेबर कोड लाए।
इसके पहले यह जानना चाहिए कि मजदूर का विषय भारत के संविधान की कॉन्करेंट लिस्ट में आता है जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों को कानून बनाने की शक्ति है केंद्र के लगभग 100 पुराने कानून तथा राज्य के 40 अधिनियम जो प्रचलन में उन्हें समाप्त करते हुए यह कर कोड ओं वेजेस कोड ओं इंडस्ट्रियल रिलेशन तथा कोड ओं सोशल सिक्योरिटी एवं कोड आफ ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन लाया गया है। अधिनियम कैसे बनता है अभी जानना आवश्यक है अधिनियम के लिए कोई भी बिल ड्राफ्ट होने के बाद या तो प्राइवेट बिल के रूप में या गवर्नमेंट बिल के रूप में
संसद के समक्ष रखा जाता है लोकसभा राज्यसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए जाता है इस अधिनियम में प्रीफिक्स,मेंस,suffix होता है सबसे पहले कोड ऑन बृजेश बिल 30 जुलाई 2019 को लाया गया जिसमें पेमेंट ऑफिस अधिनियम मिनिमम भेजी जाती नियम बोनस अधिनियम और इक्वल रैम्यूनरेशन अधिनियम को रखा गया है। इस पूरे बिल का नाम कोड ओं वेजेस है जिसमें ऑर्गेनाइज्ड अनोर्गनाइज्ड जिग कर्मी तथा फ्रीलांस वर्कर को रखा गया है।
नेशनल लेवल पर
फ्लोर वेजेस तय की गई है बृजेश की डेफिनेशन अलग-अलग अधिनियम हमें अलग-अलग थी जिसे एक समान कर दिया गया है तथा नेशनल लेवल पर तय की गई वजह से कम भेजें कोई भी नियुक्ति नहीं दे सकता है।
ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी वर्किंग कंडीशन में 13 लेवल लॉस को रखा गया है जिसमें 23 जुलाई 2019 को लागू किया गया 10 वर्कर्स से ज्यादा लोगों पर अधिनियम लगाए लगाया जाएगा जिसमें सिविल कोर्ट में अपील न होकर हाईकोर्ट में अपील होगी।
इस प्रकार इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड में ट्रेड यूनियन एक्ट इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट तथा स्टैंडिंग ऑर्डर्स जैसे अधिनियम रखे गए लोग आउट स्ट्राइक टर्मिनेशन पनिशमेंट यूनियन कैसे बनेगी आदि जैसे विषयों पर हड़ताल होने या लुकआउट होने की दिशा में 14 दिन का प्रायर नोटिस आवश्यक होगा 100 से ज्यादा तथा 300 से 500 तक लेबर होने पर राज्य सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी। इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के आदेश को सरकार चाहे तो मॉडिफाई कर सकती है चेंज कर सकती है उसे डफर कर सकती है।
इसी प्रकार कोड ओं सोशल सिक्योरिटी में पीएफ ईएसआई मैटरनिटी ग्रेच्युटी आदि को रखा गया है अब ग्रेच्युटी कॉन्ट्रैक्ट लेबर को भी मिलेगी पीएफ में एंप्लॉई अपना शेयर घटकर काम ज्यादा कर सकते हैं ग्रेच्युटी और 5 साल की सेवा करने वाले कर्मचारियों को भी प्राप्त होगी।