Here, I recite Nirvana Shatkam (निर्वाणषट्कम) by Adi Shankaracharya (8th c. CE), in Sanskrit. Here is the text:
मनो बुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहम् नच श्रोत्रजिह्वे नच घ्राणनेत्रे
नच व्योमभूमिर् न तेजो न वायु: चिदानन्दरूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥
नच प्राणसंज्ञो नवै पञ्चवायु: नवा सप्तधातुर् नवा पञ्चकोश:
न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायु: चिदानन्दरूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥
न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्यभाव:
न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्दरूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥
न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खम् न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा: न यज्ञा:
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता चिदानन्दरूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥
न मृत्युर् न शङ्का न मे जातिभेद: पिता नैव मे नैव माता न जन्म:
न बन्धुर् न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: चिदानन्दरूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥
अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्
न चासंगतं नैव मुक्तिर् न मेय: चिदानन्दरूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम् ॥