वीडियो में यह बताया जा रहा है, कि कोई भी व्यक्ति व्यापारिक प्रतिष्ठान मैं व्यापार के दौरान या किराएदार से जब मकान मालिक किराए का चेक प्राप्त करता है ,और बाद में उसे बैंक में जमा करता है। यदि बैंक में जमा किया हुआ चेक बाउंस हो गया है, तो उसके लिए आगामी क्या कार्यवाही होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि मकान मालिक₹5000 का चेक जमा जमा कराएं। 3 माह के अंदर बैंक में जमा करना होता है ।यदि वह चेक अनादरdisowner हो जाता है तो उसके तीन कारण हो सकते हैं या तो चेक जारी करता के अकाउंट में सफिशिएंट फंड नहीं है या फिर उसका खाता उसने बंद कर दिया है या स्टॉप पेमेंट के नाम से खाता बंद कर दिया है।
किस कारण से चेक डिशऑनर हुआ, उसका कारण बताते हुए चेक बैंक मेमो के साथ वापस करेगा इस बारे में आप चेक जारी करता को डिमांड नोटिस एक माह के अंदर भेजना होगा ।नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर चेक जारी करता को उसका पेमेंट करना होगा। यदि वह पेमेंट नहीं करता है तो 16 वे दिन से आपको वाद का कारण या कॉज आफ एक्शन प्रारंभ हो जाता है। आप चेक देने वाले व्यक्ति के विरुद्ध परिवाद पत्र जिसमें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत 30 दिवस के अंदर परिवाद पेश कर सकते हैं ।जिसमें दस्तावेज ओरिजिनल चेक के साथ बैंक का मेमो जिसको बैंक द्वारा आपको वापस किया गया है तथा डिमांड नोटिस की कॉपी एवं पोस्टल रिसिप्ट स्पीड पोस्ट की कॉपी आदि लगानी होगी।
चेक अनादर के लिए या आपराधिक मामले की श्रेणी में आता है, और उससे दूनी राशि की पेनेल्टी कंपनसेशन से भरना होगा।
यह कंप्लेंट प्रोपराइटर इंडिविजुअल या पार्टनर या डेट फॉर्म ए रिस्पांसिबल व्यक्ति या डायरेक्टर के खिलाफ आप लगा सकते हैं।
इस प्रकार चेक बाउंस होने के संबंध में आप जुडिशल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद पेश करके चेक जारी करता के विरुद्ध उसे 2 वर्ष की सजा तथा पेनेल्टी या कंपनसेशन 2गुना उनसे वसूल सकते हैं।
#चेक बाउंस होने पर क्या कार्यवाही की जा सकती है
#all about cheque bounce case