अधिवक्ता अनुपम गड़ेवाल ने दिलाया, दबंग बिल्डर से न्याय।

Опубликовано: 11 Март 2026
на канале: SR live
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अधिवक्ता अनुपम गड़ेवाल ने दिलाया, दबंग बिल्डर से न्याय। #shorts
बिल्डर ने घटिया किस्म का भवन बेचा जिस पर आयोग ने सेवा में कमी मानकर क्षतिपूर्ति 13,000=00 रू. एवं भवन को मरम्मत करने के निर्देष दिए आयोग ने
छिंदवाड़ा: जीवन की सारी पूंजी जोड़कर आदमी मकान लेता है लेकिन, बिल्डर सपने दिखाकर घटिया किस्म के कमजोर मकान देकर उपभोक्ताओं का शोषण करते हैं और बिल्डर अपने प्रभाव-दवाब से कार्यवाही नहीं होने देता, इसलिए आम आदमी टूट जाता है और बिल्डरों के खिलाफ कार्यवाही करने में विफल हो जाता है लेकिन, परासिया रोड पोआमा के पास स्थित सुखदेव मस्तकार पिता खेमचंद मस्तकार ने विजय वर्मा एस.आर. रियालिटिस प्रा.लिमि. छिंदवाड़ा से 17,50,500=00 रू. में वर्ष 2015 में भवन क्रय किया, उक्त भवन में छत एकदम कमजोर, किचन एवं दीवारों पर सीलन एवं घटिया किस्म की टाईल्स जिसकी वजह से भवन एक वर्ष के अंदर ही अत्याधिक कमजोर हो गया है, इस बात को लेकर भवन मालिक विजय वर्मा को षिकायत की लेकिन, उसने षिकायत की उपेक्षा करने के बाद अधिवक्ता श्री अनुपम गढ़ेवाल द्वारा सूचना पत्र प्रेषित किया गया, जिसका संतोषजनक प्रतिउत्तर विजय वर्मा द्वारा नहीं दिया गया, तो परिवादी सुखदेव मस्तकार की ओर से माननीय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग छिंदवाड़ा में वर्ष 2018 में सेवा में कमी का परिवाद प्रस्तुत किया गया, जिसमें माननीय आयोग ने परिवाद क्रमांक 44/2018 का निर्णय परिवादी सुखदेव मस्तकार के पक्ष में अधिवक्ता अनुपम गढ़ेवाल माननीय आयोग को बताया कि भवन मालिक द्वारा पानी निकासी एवं बरसाती पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, स्लैब लीकेज है एवं कमजोर है, बाथरूम और किचन की दीवारों की टाईल्स घटिया किस्म की है एवं अनेक विसंगतियों के साथ जिसमें इंजीनियर की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें इंजीनियर ने अनेक प्रकार की विसंगतियों को उजागर किया और सेवा में कमी की है, इस बात का तर्क दिया गया, जिसे माननीय आयोग में सेवा में कमी स्वीकार करते हुए विपक्षी विजय वर्मा को आदेषित किया कि वह 45 दिनों के अंदर परिवादी सुखदेव की भवन की छत में सुधार कर बरसाती पानी का प्रबंध करें, जिससे लीकेज की स्मस्या न हो, बाथरूम एवं किचन की दीवारें एवं प्लेटफार्म के नीचे आवश्यक सुधार कार्य करें, उक्त अवधि में सुधार ना करने पर 20,000=00 रू. और उस पर भुगतान दिनांक तक 6 प्रतिषत वार्षिक ब्याज दर से ब्याज का भुगतान करें, एवं परिवादी को मानसिक पीड़ा हेतु 10,000=00 रू. परिवाद व्यय के रूप में 3,000=00 रू. का भुगतान आदेश दिनांक से 45 दिनों के अंदर करें, उक्त अवधि में भुगतान न करने पर 6 प्रतिषत वार्षिक की दर से ब्याज का भुगतान करेगा, इस बात का आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष श्री विपिन बिहारी शुक्ला जी एवं सदस्य सुश्री निधि बारंगे द्वारा पारित किया गया, उपरोक्त प्रकरण में परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनुपम गढ़ेवाल ने पैरवी की।
संजय राय रिपोटर चौरई।