रेलवे की भूमि बोल कर गलत तरीके से पैमाइस कर धमकी देते हुए....

Опубликовано: 16 Июль 2026
на канале: Nari Shakti Media
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रेलवे की भूमि बोल कर गलत तरीके से पैमाइस कर बुलडोजर बाबा की धमकी देते हुए सीधे साधे लोगों के मकान पर N.E.R लिखने के संबंध में।
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सम्मानित प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बंधुओं आपको सादर अवगत कराना है कि दिनांक 9 जून 2022 को महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर 3 रेलवे कैंट स्टेशन ब्रिज वर्कशॉप के उत्तर झरना टोला स्थित आराजी संख्या 326 319 तथा 347 को रेलवे की भूमि बता कर अधिक मात्रा में रेल सुरक्षा बल एवं रेल विभाग के श्री आलोक श्रीवास्तव सहायक इंजीनियर और श्री अजय विश्वकर्मा सहायक इंजीनियर, की मौजूदगी में राजस्व विभाग रा०नि० श्री प्रदुम्न सिंह,लेखपाल श्री बृजेश सागर सिंह, लेखपाल श्री राजीव बघेल लेखपाल श्री अजय प्रजापति लेखपाल श्री अशीष पांडेय तथा आशुतोष द्वारा कूट रचित तरीके से पैमाइश किया गया और उक्त आराजियात पर बने तमाम रिहायशी मकानों पर N.E.R लिख दिया गया और बुलडोजर की धमकी दी गई। इससे वहां के मकान स्वामियों के अंदर एक दहसत फैल गई कई घरों में कई दिनों तक खाना नही बना लोगों के आखों से नींद उड़ गई कई लोगों का तबियत बिगड़ गई मेरी भी चिंता बढ़ गई क्योंकि मैं भी उक्त जमीनों का कास्तकार हूँ मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते भी लोगों को इन परिस्थितियों से निजात दिलाना चाहता था इस लिए रेल तथा राजस्व विभाग को ये जानकारी देता रहा कि जिस जमीन को आप लोग रेल की जमीन समझ रहे हैं वास्तव में वह रेल की जमीन नही है यह भी बताने का कोशिश करता रहा कि जिस आराजी संख्या 326 को आप लोग रेल की संपत्ति समझ रहे हैं वह वास्तव में कास्करों की भूमि है और जो आराजी संख्या 306 जो कास्करों के नाम से खतौनी निकल रहा है वह रेल की संपत्ति है जो गलती से कास्तकारों का नाम बोल रहा है और 326 जो कास्करों का है वह त्रुटि बस रेलवे के खतौनी में दर्ज हो गया है।
राजस्व विभाग के लोगों को इस बात की जानकारी भी थी परन्तु एक समाजसेवी की छवि को खराब करने तथा आने वाले पार्षदी चुनाव को प्रभावित करने के नियत से,किसी के प्रभाव में आकर जमीन का पैमाइस किया गया
और सीधे साधे लोगों के घरों पर N.E.R लिख कर चले गए और लोग परेशान हो कर मेरे पास आने लगे इसपर हमने भी प्रण किया कि सत्य को सामने लाकर दम लेंगे अन्ततः हमने श्रीमान भूमि अध्याप्ति अधिकारी महोदय गोरखपुर से संपर्क कर रेल अधिग्रहण 1963 के रजिस्टर का मुआयना अपने वरिष्ठअधिवक्ता के साथ किया मुआयना के बाद पता चला कि जिस जमीन को रेलवे और राजस्व विभाग रेल की संपत्ति कह कर सभी घरों पर N.E.R. लिख दिया गया था वह भूमि रेलवे ने कभी अधिग्रहण किया ही नही था वह भूमि कास्करों की है।
सही पता चलने के बाद हमने भूमि अध्याप्ति अधिकारी महोदय से सवाल जवाब के जरिए सूचना प्राप्त किया और इसकी सूचना हमने दिनांक 18-06-22 को श्रीमान तहसील दिवस अधिकारी महोदय को दिया।
उन्होंने आश्वासन दिया कि 33/39 मुकद्दमा के जरिए जल्द से जल्द कागजात को दुरुस्त कर लिया जाएगा कागजात के अवलोकन के बाद उन्होंने माना कि जिस जमीन की पैमाइश
रेलवे कैंट स्टेशन ब्रिज वर्कशॉप के उत्तर 9 जून 2022 को हुई थी वह जमीन रेल की नहीं बल्कि काश्तकारों की है।
जब यह साबित हो चुका है कि उक्त भूमि 326,319 तथा 347 काश्तकारों की है तो एक बहुत बड़ा सवाल उठता है की ऐसी लापरवाही रेल विभाग तथा राजस्व विभाग के द्वारा कैसे किया जा सकता है।
एक घर को बनाने के लिए लोग खून पसीना बहा कर तिनका तिनका जोड़कर अपना घरौंदा तैयार करते हैं और आप एक झटके में उस घरौंदे को उजाड़ने की बात बिना सोचे समझे कैसे कर सकते कोई भी कार्यवाही करने से पहले उसके जड़ तक जाना जरूरी होता है परंतु यह कार्यवाही किसी को व्यक्तिगत फायदा देने के लिए किया जा रहा था यदि जिन जिन घरों पर N.E.R लिख दिया गया था इसके वजह सेअगर उनके घरों में कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता ऐसे कार्यों के कारण आम जनता का विश्वास राजस्व विभाग के लोगों के ऊपर से उठता जा रहा है।
विश्वास कायम करने के लिए राजस्व विभाग को निष्पक्ष जाँच कर निष्पक्ष पैमाइस करना चाहिए।
ताकि आम जन मानस में शासन प्रशासन के प्रति विश्वास जागृति हो सके इसलिए मैं एक समाजसेवी होने के नाते शासन प्रशासन से मांग करता हूं कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर उन पर भी कानूनी बुलडोजर चलाना चाहिए ताकि वह भविष्य में किसी को लाभ दिलाने के चक्कर में जानबूझकर ऐसे गलतियों को अंजाम न दे सकें।
मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूं की रेलवे कैंट स्टेशन बृज वर्कशॉप के उत्तर किसी कास्करों या किसी अन्य के द्वारा रेलवे की किसीभी जमीन के भाग पर अतिक्रमण नहीं किया गया है।