बद्रीनाथ के प्रथम स्वरूप आदिबद्री की अनसुनी कहानी ||Story of Adi Badri||Panch Badri||Anshuman Mishra

Опубликовано: 06 Июнь 2026
на канале: Anshuman Mishra
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सनातन संस्कृति की विरासत तो यूं पूरी दुनिया में फैली हुई है उत्तराखंड में भी संस्कृति की झलकियां दिखती हैं

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार हिंदुस्तान में चार धाम स्थित हैं और जिसमें से एक धाम भगवान बद्रीनाथ का है बद्रीनाथ पांच स्वरूप में पूजे जाते हैं जिसमें आदि बद्री ,ध्यान बद्री, योग बद्री बद्रीनाथ ,और भविष्य बद्री हैं

हम आपको प्रथम बद्री यानी आदि बद्री की कहानी सुनाने के लिए यहां प्रस्तुत हुए हैं

कर्णप्रयाग से 14 किलोमीटर दूर और चांदपुर गढ़ी से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित भगवान आदिबद्री का यह अद्भुत मंदिर जिसमें भगवान विष्णु स्वयं विराजते हैं

कहते हैं इस मंदिर की न्यू आठवीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने रखी थी
भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार भी कहा जाता है कि आठवीं सदी से 11 वीं सदी के बीच में इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजाओं द्वारा करवाया गया था

यहां 16 मंदिरों का समूह था जो कि अब भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार 14 ही रह गए हैं इस मंदिर की आकृति और इसकी वास्तु कला देखें तो यह मंदिर पिरामिड शंकु आकार का है

भगवान विष्णु की यहां पर 3 फीट ऊंची मूर्ति विराजमान है जो युगों युगों से भक्तों का कल्याण करती आ रही है

भगवान विष्णु के साथ कई और देवी देवता यहां विराजमान है जिसमें भगवान सत्यनारायण लक्ष्मी नारायण ,भगवान राम सीता, लक्ष्मण ,हनुमान, मां गौरी, मां काली ,मां अन्नपूर्णा, भगवान भोलेनाथ, कुबेर के मंदिर स्थित हैं
हालांकि कुबेर के मंदिर में अब कुबेर की मूर्ति नहीं है क्योंकि 1995 के लगभग इस मूर्ति को दुराचारियों द्वारा चुरा लिया गया था

वैसे तो इस मंदिर के कपाट साल भर भक्तों के लिए खुले रहते हैं लेकिन पूस महीने की 14 तारीख से जनवरी में मकर संक्रांति तक इस मंदिर के कपाट लगभग 1 महीने के लिए बंद किए जाते हैं

समय कि विलंब की वजह से हम भी भगवान आदिबद्री के दर्शन करने रात्रि में पहुंचे लेकिन आप सभी को रात्रि के तस्वीरों के साथ दिन की भी तस्वीरें आपको दिखा पा रहे हैं

आदिबद्री मंदिर के बारे में बताया जाता है यहां भगवान विष्णु 3 युग जिसमें सतयुग द्वापर और त्रेता युग में विराजमान थे कलयुग में भगवान विष्णु बद्रीनाथ के रूप में बद्रीनाथ धाम चले गए

मान्यता यह भी है कि जो भी व्यक्ति बद्रीनाथ धाम नहीं पहुंच पाता वह अगर आदिबद्री आकर भगवान आदि बद्री के दर्शन कर ले तो बद्रीनाथ का ही पुण्य उसे प्राप्त हो जाता है


यह मंदिर हमारे सनातन संस्कृति की विरासत है जब कभी भी आपको उत्तराखंड आने का अवसर मिले तो आप प्रथम बद्री का स्वरूप आदि बद्री भगवान विष्णु के दर्शन अवश्य करें और आदिबद्री मंदिर के दर्शन करने के पश्चात तुलसी से बना चरणामृत जरूर ग्रहण करें कहते हैं कि अगर आप तुलसी से बने चरणामृत को ग्रहण करते हैं तो भगवान विष्णु की कृपा आप पर सदैव बनी रहती