चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़ तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुबीर॥ Tulsidas.

Опубликовано: 14 Май 2026
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चित्रकूट मंदाकिनी नदी के किनारे पर बसा भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 38.2 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला शांत और सुन्दर चित्रकूट प्रकृति और ईश्वर की अनुपम देन है। चित्रकूट! एक ऐसी अनपुम तपस्थली जहां की मिटृी, पहाडों, वनों और झरनों की खुशबू देश विदेश के योगियों, ऋषियों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है । विचित्रताओं के परिवेश में पल्लवित होती धरा का नाम अतीत से ही चित्रकूट ही है। बुन्देलखन्ड की वीर धरा पर आने वाला सैलानी यहां के अद्भुत नयनाभिराम दृश्यों को देखकर आनंदित हो उठता है। विचित्रताओं और विभिन्नताओं वाले इस क्षेत्र पर कही कल-कल करती मंदाकिनी का सुन्दर जल है तो कही विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं का उन्मुक्त यौवन विखेरती पहाडिय़ां हैं तों कही सुन्दर गुफाओं में भित्ति चित्र हैं। विध्य पर्वत में फैले विशालकाय वन आगन्तुक पर्यटक का मन मोह लेता है। धर्म- अध्यात्म का संदेश सुनाता चित्रकूट देश में मौजूद अन्य पर्यटन केंन्द्रो से सबसे अलग है। इस भूमि जब तक प्रभु श्री राम रहे हर कंटक से मुक्त रहे। चित्रकूट आने वाले के मूल में धार्मिकता के दर्शन होते है। प्रकृति की अनमोल धरोहरों से आनंदित होता व्यक्ति जब सुबह उठते ही साथ बम-बम भोले और जय श्रीराम के उदघोष घंटा घटियालों के साथ सुनता है तो वह रोमांचित होकर धर्म की इस नगरी में आकर अपने आपको पुण्य का सबसे बड़ा भागी मानता है।
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