मंडल कमीशन की सिफारिशों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी और इसी लहर पर सवार होकर लालू प्रसाद यादव बिहार की सत्ता के शिखर तक पहुंचे। 1990 का दशक सामाजिक न्याय की राजनीति का दौर था, जब पिछड़े वर्गों को पहली बार व्यापक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला। लालू यादव ने मंडल आयोग के फैसले को अपने जनाधार के विस्तार का मजबूत हथियार बनाया और “सामाजिक न्याय” के नाम पर बिहार की राजनीति में अपना प्रभुत्व स्थापित किया। मंडल आयोग की सिफारिशों ने न केवल बिहार की सामाजिक संरचना को बदला बल्कि सत्ता के समीकरणों को भी पूरी तरह से पुनर्गठित कर दिया। इस दौर ने लालू यादव को एक जननेता के रूप में स्थापित किया, लेकिन साथ ही बिहार की राजनीति में जातिगत ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन की नींव भी रख दी।