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पर्वत श्रेणियां (MOUNTAIN SYSTEM)
इस असमतल भूखंड को दो समान भागों में विभाजित करती है। इस क्षेत्र में से तीन पर्वत श्रृंखलाएं अर्थात् जांस्कर, महान हिमालय और धौलाधार लगभग समानान्तर रूप से गुजरती है। जस्कर पर्वत का अंग हो किन्नौर और तिब्बत के बीच सीमा खींचता है।
ये पर्वत इस क्षेत्र को क्रमवत दो भागों में विभाजित भी करते हैं। धौलाधार का मूंग ही किन्नौर की दक्षिण सीमा बनाता है। मुख्यतः जनपद के उच्चावचन पर ऊंची पर्वत सुखलाओं और निम्न घाटियों का साम्राज्य है। इनमें से बहुत सारे स्थानों पर तीखी चलाने युक्त कन्दराएं सीधी सतलुज नदी में उतरती दिखाई पड़ती है। इस क्षेत्र की ऊंचाई का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि सतलुज नदी का तल शिपकी ला के निकट 3050 मीटर (मध्यमान सागर तल से) के स्तर से चौरा के निकट मात्र 1220 मीटर ऊंचाई पर स्थित है और सतलुज नदी का तल ही हर स्थापन पर निम्नतम स्थल है।
किन्नौर को दो सर्वोच्च पर्वत चोटियां लियो परगियाल (6.770 मीटर) और पारासाला (6,608 मीटर) जांस्कर पर्यंत क्रम में ही स्थित हैं। किन्नर कैलाश अथवा रालदांग कैलाश (6,500 मीटर) न केवल एक उच्च पर्वत शिखर है बल्कि किन्नौर में माना हुआ एक तीर्थस्थल भी है।
धौलाधार को चोटियां अपेक्षतया कम ऊंची हैं जिनकी ऊंचाई 4,877 मीटर से 5,979 मीटर के बीच है।
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