भारत के हिंदू युवाओं को सपना दिखाया गया था अमृत काल और विश्वगुरु होने का। न तो अमृत रस मिला और न ही विश्वगुरु कहलाए जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उल्टे उनकी जवानी मुसलमानों से नफ़रत करने और उनके खिलाफ़ अपराध करने में बर्बाद हो रही है। आख़िर कब तक गौरक्षा और हिंदू सुख के नाम पर यह सब जारी रहे? इस देश में मुसलमान होना अपराध बना दिया गया है। जो उनके खिलाफ़ हो रहे सांप्रदायिक अपराधों की सहमति में चुप थे वे आज भी चुप हैं और जो बोलते रहे हैं उनमें से कई थक चुके हैं। लगता है सबने चुप रहना स्वीकार कर लिया।
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/ @ravishkumar.official