अंतर्मन के अंधियारे में बुद्ध की ज्योति जला रखा है
Act & Sing by: Shilpee Shakya,
Lyrics & Direction By: A.K.Maurya 'Shashank' , 9821641426
Recording Studio: Vyom Entertainment,
Video Edit By: Rahul Kate
Contribution: Deepika, Oshmi, Yug
गीत
अंतर्मन के अंधियारे में
बुद्ध की ज्योति जला रखा है ...२
चंद्पलों के इस जीवन को
परहित हेतु लगा रखा है ...२
०१
प्रेम उत्सर्जित हो, ज्ञान भी अर्जित हो
व्यसन हर वर्जित हो, यही आशाएं हैं.
बुद्ध की दाया में, धम्म के साया में
संघ की छाया में , ऐसी क्षमताएं हैं
तीनो शरणों में आकर के मन पावन होगा,
जीवन पावन होगा
खुशियों के सुमनों को चुन चुन...२
जीवन वन में सजा रखा है ....२
अंतर्मन के, अंधियारे में
बुद्ध की ज्योति जला रखा है
०२
प्यार की भाषा में, मन की अभिलाषा में
शांति की आशा में, जियेंगे मिल जुल हम
देश उन्नत होगा, द्वेष अवनत होगा,
शौर्य प्रोन्नत होगा, बने उस काबिल हम
हर कण कण कुंदन बन जाए ऐसा कर्म करें
कुछ ऐसा कर्म करें
बुद्ध धम्म ही, विश्व धरम हो, ....२
ये अरमान बना रखा है....२
अंतर्मन के अंधियारे में
बुद्ध की ज्योति जला रखा है ....२
चंद्पलों के इस जीवन को
परहित हेतु लगा रखा है .....२
गीत: शशांक मौर्य