उस राजा की क्या दुर्दशा होगी जिसकी रानी और मंत्री भी उसके खिलाफ ही खड़े हुए हैं. उसको लग रहा है उसे राजा की क्या दुर्दशा होगी? क्या है वो राजा? किस बात का राजा, वही दशा इसकी है. ईश्वर अंश सचिवीव विलासी चैतन्यमल आनंद सुुख राशि वो जीवात्मा बुद्धि की प्रियता में मैन की सलाह में फंस कर निकृष्ट भोगों में कहां आनंद राशि, कहां चिदानंद घन स्वरूप और कहां मालिन प्राकृतिक भोग हर में दस का सोच ही नहीं का रहा है.