यह मन की चालबाजी जो तुम्हारे अंदर एक बार देख लेते हैं. हृदय में जलन होती पीड़ा, होती व्यथा होती है. उपासक उसकी काट तो जानता है पर प्रयोग नहीं कर रहा विषय. आकर्षण के करण कैट जाता उपासक तभी बनाएं उसको पता है अगर उपासक है तो सत्संग सुनााई होगा शास्त्र स्वाध्याय कियात्स इसी के लिए तो ज्ञान मिलता है इन्ह. से लड़ने के लिए और उस समय विषयप्रीता होने के कारण उनका प्रयोग करना भूल जाता है.