ब्रह्म ऋषि महापुरुष इनके अनुभव की बात है. न जातू कामा कामना मुख भोगे न शाम्यति समझ लो. मैन को ठीक करने के लिए महापुरुषों के वचन ही स्वस्त्र हैं. वचन ही प्रमाण हैं. जब हमारा मैन यह लालसा पैदा करता है तभी हम उसमें तदात्म हो जाते हैं. क्योंकि हम सुख के लोभी हैं. वह हमें सुख दिखाता है बस ऐसे.