अब जो यह बात आई है इस पर समझना होगा. पहली बात तो हमने पूरी आपको बता दें कि कहीं हमको लड़डखडाना नहीं निरसा. नहीं होना किसी भी स्थिति में निश्चित भागवत प्रप होगी चुप. शान. कहीं कोई इसमें तर्क की कोई गुंजाइश नहीं है. भागवत में लिखा हुआ अगर मेरा भक्त है, अनन्या है उसके हृदय में नाना प्रकार की विषयvsny तो मैं उसके हृदय में बैठकर उसको निर्विकार करतास जी बयालीस लीला में कहतेक्त विषयियन बस ओ एक कर्मठ कोटि जितेंद्र तेई समल कोई यदि श्यामा श्याम का पर भी सही है तो करो कर्मकांड और जितेंद्र की समान कर सकते क्योंकि कर्मकांड को कर्म पर विश्वास है. जितेंद्र को अपनी जितेंद्रता पर विश्वास है और इसको प्यारी जो प्यारे का भरोसा है लेकिन इसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता.