नासिरा शर्मा की नेपाल यात्रा 1994

Опубликовано: 14 Июль 2026
на канале: Nasera Sharma
103
12

नासिरा शर्मा की 1994 की पहली नेपाल यात्रा का पूरा वृतांत सुनकर लगता है कि कैसे महज़ 14-15 मिनट ने हम सबने नेपाल की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक यात्रा कर ली। बहुत कुछ जान लिया। हिमालय की गोद में बसा एक शांत मुल्क जहाँ न केवल प्राकृतिक सौन्दर्य है बल्कि वह सांस्कृतिक तौर पर भी काफ़ी समृद्ध है। नासिरा शर्मा द्वारा 6 खंडों में संपादित अदब में बाईं पसली के खंड -1 (एफ्रो एशियाई कविताओं पर केंद्रित) में पहला देश नेपाल ही है। इसमें नेपाल के बारे में नासिरा जी की बेहतरीन भूमिका है। इसमें संकलित 5 कवयित्रियों की कविताओं को आवश्यक परिचय के साथ दिया गया है। ये पाँच कवयित्री हैं – पारिजात, कुंदन शर्मा, भुवन धुगाँना, बनिता गिरी और सीता पांडेय।

पाँचों कवयित्रियों की कविताएँ :
पारिजात : मैं और मेरा अतीत, लाल गुलाब, माँ;
कुंदन शर्मा : नया ब्रह्मांड, आज़ादी;
भुवन धुगाँना : दर्द, हम: मछलियाँ;
बनिरा गिरी : अवैध संबंध, औरत
सीता पांडेय : भावना का दुर्ग, काला ताल

ये सभी कविताएँ लाजवाब हैं जो नेपाल के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य को समझने व अध्ययन करने के लिए खासी महत्त्वपूर्ण हैं। इनके ज़रिए वहाँ की सामाजिक स्थितियों का आकलन भी भलीभाँति किया जा सकता है। इन्हें सुनते हुए समाज का पूरा चित्रण हमारी आँखों के सामने आ जाता है।

आइए सुनते हैं नासिरा शर्मा की आवाज़ में इन सभी कवयित्रियों का परिचय और उनकी कविताओं का प्रभावशाली पाठ। नासिरा जी की आवाज़ की मिठास का जादू उनकी यात्रा के खूबसूरत पलों को और जीवंत बनाता है। साथ ही मनमोहक खूबसूरत दृश्य एवं फोटो भी इसे यादगार बनाते हैं।